
योगी सरकार ने किसानों (Farmers) की सुविधा के लिए गेहूं की सरकारी खरीद के नियमों में एक और ढील दी है। बिचौलियों की निर्भरता और दस्तावेजों के अभाव में होने वाली परेशानियों को देखते हुए ‘फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry)’ को अनिवार्यता हटा ली गई है। अब किसान बिना किसी रजिस्ट्रेशन के सीधे सरकारी केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेच सकेंगे। यह फैसला खासतौर पर उन किसानों के लिए वरदान साबित होगा, जहां चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है, जिससे उनके पास अपडेटेड रजिस्ट्री सर्टिफिकेट नहीं है।
Farmer Registry (Overview in Table)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रक्रिया का नाम | उत्तर प्रदेश गेहूं खरीद (Wheat Procurement) योजना |
| नियम में बदलाव | ‘फार्मर रजिस्ट्री’ को हटाया गया (अनिवार्यता समाप्त) |
| लाभार्थी | समस्त उत्तर प्रदेश के किसान, विशेष रूप से चकबंदी प्रभावित या बिना दस्तावेज वाले |
| एमएसपी (MSP) दर | 2,585 रुपये प्रति क्विंटल |
| खरीद सीमा | विभिन्न श्रेणियों के किसानों के लिए (छोटे/बड़े/अनुसूचित जाति) अलग-अलग, अधिकतम 50-80 क्विंटल |
| भुगतान का माध्यम | 48 घंटे के भीतर डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे खाते में |
| क्रय केंद्रों की संख्या | राज्य में 6,500 से अधिक क्रय केंद्र स्थापित |
| प्रभावी तिथि | तत्काल प्रभाव से (वर्ष 2026-27 की खरीद प्रक्रिया के दौरान) |
क्यों बदलना पड़ा नियम? (पुरानी व्यवस्था बनाम नई व्यवस्था)
पहले जहां रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था, वहीं अब किसानों को इसकी जरूरत नहीं है। यह बदलाव सरकार ने बड़ी संख्या में किसानों की शिकायतों और दिक्कतों को देखते हुए किया।
| पहले (पुरानी व्यवस्था) | अब (नई व्यवस्था) |
|---|---|
| किसानों के लिए ऑनलाइन फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry) सर्टिफिकेट अनिवार्य था। | फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता पूरी तरह हटा दी गई है। |
| दस्तावेज न होने पर किसानों को खरीद केंद्रों से लौटना पड़ता था। | किसान नई व्यवस्था लागू होने से पहले की तरह ही सीधे अपनी उपज केंद्र पर ले जा सकते हैं। |
| कई किसान मजबूरी में बिचौलियों के हाथों सस्ते में गेहूं बेचने को बाध्य थे। | बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और फसल का सही दाम मिल सकेगा। |
| विशेष रूप से चकबंदी (Chakbandi) प्रभावित गांवों (जहां भूमि का पुनर्विन्यास चल रहा है) के किसानों को सबसे अधिक परेशानी होती थी। | इन चकबंदी प्रभावित किसानों को पुरानी व्यवस्था के तहत ही फसल बेचने की छूट दे दी गई है。 |
यूपी में एमएसपी (FAQs)
यहाँ किसानों के मन में उठने वाले कुछ सामान्य प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं:
प्रश्न 1: क्या रजिस्ट्रेशन की यह छूट पूरी तरह से स्थायी है?
उत्तर: फिलहाल, यह छूट चालू गेहूं खरीद सत्र (2026-27) के लिए दी गई है ताकि किसानों को तत्काल राहत मिल सके।
प्रश्न 2: क्या बिना रजिस्ट्रेशन वाले किसानों को भी एमएसपी (MSP) का पूरा लाभ मिलेगा?
उत्तर: हां, बिना पंजीकरण वाले किसानों को भी पंजीकृत किसानों के समान ही दर्जा और सुविधाएं दी जाएंगी और उन्हें पूरा MSP मूल्य मिलेगा。
प्रश्न 3: क्या इस फैसले से चकबंदी (Chakbandi) प्रभावित किसानों को विशेष रूप से लाभ मिलेगा?
उत्तर: हाँ! यह फैसले का मुख्य उद्देश्य चकबंदी प्रभावित किसानों को राहत देना है, क्योंकि चकबंदी के कारण अक्सर उनके पास अपडेटेड फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पाती थी।
प्रश्न 4: अगर मैं पहले से रजिस्टर्ड नहीं हूं, तो मैं अपना गेहूं कैसे बेचूं?
उत्तर: आप बिना किसी पूर्व पंजीकरण के सीधे अपने नजदीकी सरकारी खरीद केंद्र पर अपनी फसल ले जा सकते हैं और वहां मौजूद अधिकारी आपकी फसल की जांच करके खरीदारी करेंगे।
प्रश्न 5: गेहूं बेचने पर मुझे पैसे कब मिलेंगे?
उत्तर: सरकारी एजेंसियों द्वारा 48 घंटों के भीतर डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से आपके बैंक खाते में भुगतान कर दिया जाएगा।
प्रश्न 6: एक बार में अधिकतम कितना गेहूं बेच सकता हूं?
उत्तर: किसान की श्रेणी (जैसे छोटा, सीमांत, बड़ा, अनुसूचित जाति आदि) के अनुसार अलग-अलग सीमा निर्धारित है, जो सामान्यतः 50 क्विंटल से 80 क्विंटल के बीच होती है। यह सीमा केंद्र सरकार द्वारा हर वर्ष तय की जाती रही है।
प्रश्न 7: क्या सभी प्रकार के गेहूं की खरीदी होगी?
उत्तर: हां, सरकारी एजेंसियों द्वारा की गई गुणवत्ता जांच में उत्तीर्ण होने वाले गेहूं को ही MSP पर खरीदा जाता है।
प्रश्न 8: क्या इस छूट का फायदा अन्य राज्यों के किसान उठा सकते हैं?
उत्तर: नहीं, यह राहत केवल उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए है, क्योंकि गेहूं खरीदने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। हालांकि, अन्य राज्यों में भी अलग-अलग नियम लागू हैं।
प्रश्न 9: क्या मुझे रजिस्ट्रेशन न कराने पर भविष्य में कोई परेशानी हो सकती है?
उत्तर: फिलहाल, गेहूं खरीद ही एकमात्र मुद्दा है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रजिस्ट्रेशन करा लेना चाहिए, क्योंकि यह किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल बीमा, और सरकारी योजनाओं के लिए लाभदायक साबित होता है।
प्रश्न 10: इस राहत का लाभ लेने की अंतिम तिथि क्या है?
उत्तर: चालू खरीद सत्र में, सरकार ने 30 अप्रैल, 2026 तक सत्यापन बिना भी गेहूं खरीदने का आदेश जारी किया है। लेकिन किसान तब तक बेच सकते हैं, जब तक खरीद केंद्र खुले हैं। किसी भी नवीनतम जानकारी के लिए विभाग की वेबसाइट देखते रहें।
निष्कर्ष
योगी सरकार का यह फैसला ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की तर्ज पर ‘ईज ऑफ फार्मिंग’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। बिना किसी दस्तावेजी अड़चन के एमएसपी पर फसल बेच पाने की स्वतंत्रता निस्संदेह किसानों को आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करेगी और उनके जीवन स्तर को उठाने में सहायक होगी।


