
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों को भूजल स्तर के संरक्षण के लिए प्रोत्साहित करने हेतु खरीफ सीजन 2026 के लिए “मेरा पानी मेरी विरासत योजना” को पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है। इस योजना के तहत धान की फसल छोड़कर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें उगाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 8 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इसके साथ ही, दलहन, तिलहन और कपास की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 2 हजार रुपये का अतिरिक्त बोनस भी दिया जाएगा। यह योजना राज्य में घटते भूजल स्तर को रोकने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
एक नजर में: योजना का अवलोकन (Scheme Overview)
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | मेरा पानी मेरी विरासत योजना 2026 |
| राज्य | हरियाणा |
| सीजन | खरीफ 2026 |
| लाभार्थी | धान छोड़कर कम पानी वाली वैकल्पिक फसलें उगाने वाले किसान |
| प्रमुख लाभ (अनुदान) | ₹8,000 प्रति एकड़ |
| अतिरिक्त बोनस | दलहन, तिलहन, कपास पर ₹2,000 प्रति एकड़ |
| पंजीकरण प्रारंभ तिथि | 20 मई 2026 |
| पंजीकरण की अंतिम तिथि | 15 जून 2026 |
| आवेदन का तरीका | ऑनलाइन (मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के माध्यम से) |
| आधिकारिक वेबसाइट | https://fasal.haryana.gov.in |
योजना का उद्देश्य (Objective)
इस योजना का मुख्य उद्देश्य हरियाणा में लगातार गिर रहे भूजल स्तर को रोकना है। धान की फसल की पैदावार में अत्यधिक पानी की खपत होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, धान की फसल में एक किलो चावल पैदा करने के लिए लगभग 3,000 से 5,000 लीटर पानी की खपत होती है। इस योजना के माध्यम से सरकार किसानों को धान की खेती के बजाय मक्का, कपास, दलहन, तिलहन और बागवानी जैसी कम पानी वाली फसलें अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
योजना के लाभ: किसानों को क्या मिलेगा? (Benefits for Farmers)
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प्रोत्साहन राशि: सरकार धान की जगह वैकल्पिक फसलें उगाने वाले सभी किसानों को प्रति एकड़ ₹8,000 देगी।
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अतिरिक्त बोनस: दलहन (जैसे अरहर, मूंग, मोठ, उड़द), तिलहन (जैसे तिल, अरंडी, मूंगफली) और कपास की खेती करने वाले किसानों को सामान्य अनुदान के अतिरिक्त अतिरिक्त बोनस के रूप में ₹2,000 प्रति एकड़ दिए जाएंगे।
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परती भूमि को भी लाभ: इस वर्ष जिन किसानों ने धान नहीं लगाकर अपना खेत खाली (परती) छोड़ा है, वे भी इस योजना के तहत लाभान्वित होंगे।
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हरी खाद पर सब्सिडी: जो किसान खेत में हरी खाद के रूप में ढैंचा उगाते हैं, उन्हें ₹1,000 प्रति एकड़ की सब्सिडी भी दी जाएगी।
वैकल्पिक फसलें: क्या बोयें? (List of Alternative Crops)
यदि कोई किसान धान की फसल न लगाकर नीचे दी गई किसी भी फसल को उगाता है, तो वह इस योजना के लिए पात्र होगा:
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अनाज: मक्का, बाजरा
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दलहन: अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, ग्वार, सोयाबीन
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तिलहन: तिल, अरंडी, मूंगफली
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व्यावसायिक फसलें: कपास
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चारा फसलें: विभिन्न प्रकार की चारा फसलें
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बागवानी फसलें: फल, सब्जियां, खरीफ प्याज
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कृषि वानिकी (Agroforestry): पॉपलर (पापुलर) और सफेदा
कृपया ध्यान दें: वैकल्पिक फसलों का चयन करते समय किसान अपनी मिट्टी और जलवायु के अनुसार ही फसल का चुनाव करें। कृषि विभाग किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार सुविधा उपलब्ध करवाएगा।
पंजीकरण कैसे करें? (Online Registration Process)
इस योजना के तहत अनुदान प्राप्त करने के लिए सभी किसानों के लिए “मेरी फसल मेरा ब्योरा” पोर्टल पर पंजीकरण करना अनिवार्य है। पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया यहाँ बताई गई है:
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पोर्टल खोलें: सबसे पहले, हरियाणा सरकार के कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://fasal.haryana.gov.in या “मेरी फसल मेरा ब्योरा” की वेबसाइट पर जाएं।
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लॉगिन करें: पोर्टल पर जाकर “किसान पंजीकरण” या “Login” के लिंक पर क्लिक करें। यदि आप पहले से पंजीकृत नहीं हैं, तो “New User” या “Register” के माध्यम से अपना पंजीकरण करें।
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विवरण भरें: खेत के ब्योरे, फसल की जानकारी और व्यक्तिगत विवरण सही-सही दर्ज करें। अपने जमीन के कागजात (जमाबंदी) का विवरण भी सुनिश्चित करें।
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सबमिट करें: सभी जानकारी भरने के बाद फॉर्म सबमिट करें और भविष्य के लिए पंजीकरण संख्या (Registration ID) और कन्फर्मेशन पेज को सेव कर लें।
धान की सीधी बिजाई (Direct Seeding of Rice) को भी प्रोत्साहन
यदि कोई किसान पूरी तरह से धान छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, तो भी उसके लिए एक विकल्प मौजूद है। सरकार धान की सीधी बिजाई (डीएसआर) को बढ़ावा दे रही है। यह विधि पारंपरिक विधि (धान की रोपाई) की तुलना में काफी कम पानी की खपत करती है। इसके लिए, सरकार ने महेंद्रगढ़ को छोड़कर सभी जिलों में डीएसआर योजना लागू कर दी है। इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को भौतिक सत्यापन के बाद ₹4,500 प्रति एकड़ का अनुदान दिया जाएगा। इसके अलावा, पारंपरिक रोपाई पर 15 जून तक पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
महत्वपूर्ण तिथियां और सावधानियां (Important Dates & Cautions)
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पंजीकरण की अंतिम तिथि: 15 जून 2026। इस तिथि के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा और कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़े से सावधान रहें। योजना के तहत आवेदन पूरी तरह से निःशुल्क है। कोई भी एजेंट या वेबसाइट पैसे मांगती है, तो वह धोखाधड़ी है।
योजना का वास्तविक प्रभाव (Ground Impact)
यह योजना केवल सरकारी कागजों तक सीमित नहीं है। वर्ष 2025-26 के खरीफ सीजन में इस योजना के तहत 13,500 किसानों को ₹15.75 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। इसी प्रकार, फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत 5.54 लाख किसानों को ₹461.75 करोड़ दिए गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: क्या यह योजना पूरे हरियाणा में लागू है?
उत्तर: हाँ, खरीफ सीजन 2026 के लिए यह योजना हरियाणा के सभी जिलों में लागू की गई है।
प्रश्न: क्या धान की जगह बागवानी करने पर भी अनुदान मिलेगा?
उत्तर: हाँ, फल, सब्जियाँ और खरीफ प्याज लगाने वाले किसान भी इस योजना के लिए पात्र होंगे और उन्हें 8,000 रुपये प्रति एकड़ का अनुदान मिलेगा।
प्रश्न: यदि मैं कई तरह की फसलें उगाता हूँ, तो क्या मुझे कई बार अनुदान मिलेगा?
उत्तर: अनुदान की गणना कुल क्षेत्रफल के हिसाब से की जाएगी। यदि आप धान छोड़कर किसी भी वैकल्पिक फसल की खेती करते हैं तो आपको अनुदान मिलेगा।
प्रश्न: क्या केवल बड़े किसान ही इस योजना का लाभ उठा सकते हैं?
उत्तर: नहीं, यह योजना सभी प्रकार के किसानों (छोटे, सीमांत, बड़े) के लिए खुली है।


