बिहार जैविक खेती प्रोत्साहन योजना: गोबर गैस प्लांट पर मिलेगा 22,500 रुपये अनुदान | Bihar rajya fasal sahayata yojana

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बिहार के किसानों के लिए एक और लाभकारी योजना शुरू की गई है। जैविक खेती प्रोत्साहन योजना (Organic Farming Promotion Scheme) के तहत राज्य सरकार किसानों को गोबर गैस संयंत्र (बायोगैस प्लांट) लगाने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। यह योजना न केवल किसानों को ईंधन और बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि इससे निकलने वाले अपशिष्ट (स्लरी) का उपयोग जैविक खाद के रूप में करके वे अपनी खेती की लागत भी कम कर सकेंगे। इस रिपोर्ट में हम आपको गया जिले के संदर्भ में इस योजना की पूरी जानकारी दे रहे हैं।

योजना का संक्षिप्त विवरण (Overview)

यह योजना बिहार सरकार के कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना और जैविक खेती को बढ़ावा देना है। गया के जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) अजय कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना के तहत किसान अपने घरों में छोटे गोबर गैस संयंत्र स्थापित कर सकते हैं।

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मुख्य बिंदु विवरण
योजना का नाम जैविक खेती प्रोत्साहन योजना
संचालन विभाग कृषि विभाग, बिहार सरकार
लाभ गोबर गैस संयंत्र (बायोगैस प्लांट) की स्थापना पर अनुदान
पात्र लाभार्थी पशुधन (गाय-भैंस) रखने वाले किसान
आवेदन का तरीका ऑनलाइन (डीबीटी पोर्टल के माध्यम से)
अनुदान राशि अधिकतम ₹22,500 प्रति इकाई (2 घन मीटर क्षमता वाले प्लांट के लिए)

योजना के तहत मिलने वाला अनुदान (Subsidy Details)

कृषि विभाग ने गोबर गैस संयंत्र की लागत को कम करने के लिए एक निश्चित राशि का अनुदान निर्धारित किया है। यह अनुदान सीधे लाभार्थी किसान और संयंत्र लगाने वाले सेवा प्रदाता (सर्विस प्रोवाइडर) को दिया जाता है।

  • संयंत्र की क्षमता: योजना के तहत मुख्य रूप से 2 घन मीटर क्षमता वाले ‘दिनबंधु मॉडल’ के गोबर गैस संयंत्र को शामिल किया गया है। इसके लिए कम से कम 10×12 वर्ग फीट जमीन की आवश्यकता होती है।

  • अनुदान का वितरण: सरकार अधिकतम एक इकाई पर कुल 22,500 रुपये का अनुदान देती है।

अनुदान प्राप्तकर्ता राशि
किसान (लाभार्थी) ₹21,000
सेवा प्रदाता (प्लांट लगाने वाला) ₹1,500
कुल अनुदान ₹22,500

योजना के लाभ (Benefits of the Scheme)

इस योजना के तहत गोबर गैस संयंत्र लगाने से किसानों को कई तरह के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ होंगे:

  • एलपीजी की बचत: गोबर गैस से खाना बनाने पर एलपीजी सिलेंडर पर होने वाले मासिक खर्च (लगभग 1,000-2,000 रुपये) में बचत होगी।

  • जैविक खाद का उत्पादन: गैस बनने के बाद टंकी से निकलने वाला स्लरी (अपशिष्ट) उत्तम जैविक खाद है। इसका उपयोग वर्मी कंपोस्ट की तरह करके फसल की पैदावार बढ़ाई जा सकती है और रासायनिक उर्वरकों की लागत बचाई जा सकती है।

  • बिजली उत्पादन: इस संयंत्र से खाना बनाने के अलावा बिजली का भी उत्पादन किया जा सकता है, जिससे छोटे कामों के लिए बिजली की आवश्यकता पूरी हो सकती है।

  • पर्यावरण संरक्षण: यह एक स्वच्छ ईंधन है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है और यह धुएं से मुक्त खाना पकाने का माध्यम प्रदान करता है।

पात्रता (Eligibility Criteria)

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को निम्नलिखित शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • आवेदक बिहार राज्य का किसान होना चाहिए।

  • उसके पास कम से कम दो-चार पशुधन (गाय या भैंस) होने चाहिए, ताकि पर्याप्त मात्रा में गोबर उपलब्ध हो सके।

  • संयंत्र स्थापित करने के लिए आवश्यक जगह (कम से कम 10×12 वर्ग फीट) होनी चाहिए।

  • किसान ने पहले इस योजना के तहत अनुदान न लिया हो (एक बार में केवल एक इकाई के लिए ही पात्र)।

आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)

आवेदन के समय निम्नलिखित दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी:

  • आधार कार्ड

  • निवास प्रमाण पत्र

  • किसान प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो)

  • पशुधन के प्रमाण के तौर पर कोई दस्तावेज (जैसे पशुपालन विभाग से जारी कोई पहचान पत्र)

  • बैंक खाता पासबुक (आधार से लिंक)

  • पासपोर्ट साइज फोटो

  • मोबाइल नंबर

आवेदन कैसे करें? (Application Process)

गोबर गैस संयंत्र पर अनुदान पाने के लिए किसानों को डीबीटी पोर्टल (dbtagriculture.bihar.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार होगी:

  1. पोर्टल पर जाएं: कृषि विभाग, बिहार के डीबीटी पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

  2. योजना चुनें: पोर्टल पर उपलब्ध योजनाओं की सूची में से “जैविक खेती प्रोत्साहन योजना” या “गोबर गैस संयंत्र अनुदान योजना” का विकल्प चुनें।

  3. पंजीकरण करें: नए उपयोगकर्ता के रूप में पंजीकरण करें। अपना नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करें।

  4. आवेदन फॉर्म भरें: ऑनलाइन फॉर्म में व्यक्तिगत जानकारी, पशुधन की जानकारी और बैंक विवरण सही-सही भरें।

  5. दस्तावेज अपलोड करें: मांगे गए सभी दस्तावेजों की स्कैन की हुई प्रतियां निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।

  6. फॉर्म जमा करें: सभी जानकारी भरने और दस्तावेज अपलोड करने के बाद फॉर्म को अंतिम रूप से जमा (सबमिट) कर दें। आवेदन की रसीद डाउनलोड करके सुरक्षित रख लें।

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि कुछ ही दिनों में इसके लिए पोर्टल खोल दिया जाएगा, जिसके बाद किसान आवेदन कर सकेंगे।

महत्वपूर्ण बातें (Important Points)

  • योजना के तहत पोर्टल खुलने की तिथि की जानकारी के लिए किसान अपने ब्लॉक कृषि कार्यालय या जिला कृषि पदाधिकारी के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

  • गया जिले में वर्ष 2022-23 में तीन किसानों को इस योजना का लाभ मिल चुका है।

  • गोबर गैस संयंत्र में ताजा गोबर का ही उपयोग करना चाहिए, जिससे गैस उत्पादन बेहतर होता है।

  • संयंत्र से निकलने वाले स्लरी का इस्तेमाल खेतों में करने से पहले उसे कुछ दिनों के लिए गड्ढे में सड़ा लेना चाहिए, ताकि वह अच्छी खाद बन जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: इस योजना के तहत कितने क्षमता का गोबर गैस प्लांट लगाया जा सकता है?
उत्तर: इस योजना के तहत मुख्य रूप से 2 घन मीटर क्षमता के ‘दिनबंधु मॉडल’ के प्लांट के लिए अनुदान दिया जाता है।

प्रश्न: क्या बिना पशुधन वाला किसान भी इस योजना का लाभ ले सकता है?
उत्तर: नहीं, इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिनके पास स्वयं के पशुधन (गाय-भैंस) हैं, ताकि गोबर की नियमित आपूर्ति हो सके।

प्रश्न: क्या सिर्फ गया जिले के किसानों के लिए यह योजना है?
उत्तर: यह योजना पूरे बिहार के लिए है। यह खबर गया जिले के संदर्भ में है, जहां के कृषि पदाधिकारी ने यह जानकारी दी है। अन्य जिलों के किसान भी पात्रता पूरी करने पर आवेदन कर सकते हैं।

प्रश्न: अनुदान की राशि सीधे खाते में आएगी या नकद दी जाएगी?
उत्तर: अनुदान की राशि सीधे लाभार्थी किसान और सेवा प्रदाता के बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।

प्रश्न: क्या इस संयंत्र से सिर्फ खाना बनाने के लिए गैस मिलती है या बिजली भी बना सकते हैं?
उत्तर: हां, इस संयंत्र से खाना बनाने के अलावा बिजली का उत्पादन भी किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए अतिरिक्त उपकरण (जनरेटर सेट) की जरूरत पड़ सकती है।

प्रश्न: अगर मुझे पोर्टल पर आवेदन करने में दिक्कत हो रही है तो कहां संपर्क करूं?
उत्तर: आप अपने प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) या जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। वहां से आवेदन में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

बिहार सरकार की यह योजना किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। कम जगह में लगने वाला यह गोबर गैस प्लांट न केवल ईंधन और बिजली बचाएगा, बल्कि बेहतरीन जैविक खाद भी उपलब्ध कराएगा। सरकार से मिलने वाला 22,500 रुपये का अनुदान इसे और भी किफायती बना देता है। यदि आप पात्र हैं और आपके पास पशुधन है, तो पोर्टल खुलते ही आवेदन करके इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

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