खेत बचाओ अभियान 2026: किसानों को टिकाऊ और उन्नत खेती की दी जाएगी जानकारी

रायपुर | नई दिल्ली। देश भर के किसानों की उपजाऊ जमीनों को बचाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत कर दी है। यह अभियान 1 जून 2026 को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव से राष्ट्रीय स्तर पर लांच किया गया और यह एक माह तक यानी 30 जून 2026 तक चलेगा

केंद्रीय मंत्री ने रामसिया गांव से किया शुभारंभ

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 1 जून 2026 को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के रामसिया गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत करते हुए किसानों को साफ संदेश दिया कि अगर मिट्टी सुरक्षित रहेगी तो कृषि फलेगी-फूलेगी, किसान सशक्त बनेंगे और देश समृद्ध होगा। इस अवसर पर उन्होंने अभियान को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय जनआंदोलन बताया

अभियान के मुख्य उद्देश्य

‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:

  • संतुलित उर्वरक उपयोग: कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों को मृदा परीक्षण (सॉइल टेस्ट) के आधार पर उर्वरकों के सही मिश्रण के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जा रहा है

  • जैविक खेती को बढ़ावा: हरी खाद, जैविक और जैव-उत्पादों (बायो-प्रोडक्ट्स) के उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है

  • प्राकृतिक खेती का प्रचार: रासायनिक खाद के कम इस्तेमाल के साथ प्राकृतिक और जैविक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है

  • मृदा संरक्षण एवं जल प्रबंधन: मिट्टी के कटाव को रोकना, नमी बनाए रखना और जल संरक्षण की उन्नत तकनीकों को अपनाना

  • उन्नत फसल प्रबंधन: वैज्ञानिक तौर-तरीकों और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन तकनीकों (Integrated Nutrient Management) की सीधे खेतों में प्रदर्शन करके किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है

देशभर में व्यापक जनभागीदारी

केंद्रीय कृषि मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, 4 जून 2026 तक इस अभियान से 9.42 लाख से अधिक किसान जुड़ चुके थे। 1 से 8 जून 2026 के बीच पूरे देश में 4,393 से अधिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें 4,44,240 किसानों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, 8,850 से अधिक खेतों पर सीधा प्रदर्शन कराया गया ताकि किसान नई तकनीकों को समझ सकें और अपने खेतों में लागू कर सकें

विशेषज्ञों की टीमें गांवों में कर रही हैं भ्रमण

अभियान के दौरान कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें और जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। खेतों के स्थाई स्वास्थ्य और उत्पादकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है

खेत बचाएंगे तभी तो होगी अन्नदाता की उन्नति

अभियान की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता लगातार घट रही है, जो आने वाले समय में एक गंभीर संकट पैदा कर सकता है। इसलिए, ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत ही मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के महत्व पर फिर से जोर दिया जा रहा है, जो पहले से ही किसानों को मिट्टी की जांच कराने और उसी के मुताबिक खाद डालने के लिए प्रोत्साहित करता है

‘खेत बचाओ अभियान’ सिर्फ एक माह का कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि यह देश के किसानों और उनकी भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थायी और समृद्ध कृषि व्यवस्था की नींव रखने का प्रयास है। अगर आप भी एक किसान हैं, तो इस अभियान से जुड़ें और मिट्टी की जांच जरूर कराएं। याद रखें, स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध खेती और सुरक्षित भविष्य की कुंजी है।

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