भोपाल। मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी माँ नर्मदा के आशीर्वाद से प्रदेश में विकास की एक नई और अविरल धारा प्रवाहित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नर्मदा के जल ने न केवल प्रदेश की प्यास बुझाई है, बल्कि औद्योगिक और कृषि विकास की नींव को भी मजबूत किया है। यह बात उन्होंने इंदौर में आयोजित एक भव्य जनसभा में कही, जहाँ उन्होंने नर्मदा जल परियोजना के चतुर्थ चरण का भूमि-पूजन किया और कई विकासात्मक परियोजनाओं का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नर्मदा से जुड़ी परियोजनाओं को अभूतपूर्व गति मिली है। सरदार सरोवर परियोजना के माध्यम से निमाड़ सहित कई क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिला है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि होलकर साम्राज्य ने भी माँ नर्मदा के आशीर्वाद से ही सनातन संस्कृति को सशक्त रखा और देशभर में तीर्थ स्थलों का विकास किया।
इंदौर को मिली विकास की सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर शहर की पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 1356 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली नर्मदा जल परियोजना के चतुर्थ चरण का भूमि-पूजन किया। इस परियोजना के पूर्ण होने पर शहर की बढ़ती जनसंख्या की दीर्घकालिक जल आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।
इसके अलावा, रामसर साइट सिरपुर में 62.72 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का भी लोकार्पण किया गया। यह संयंत्र सिरपुर तालाब को प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो एक संरक्षित रामसर स्थल है।
‘संकल्प से समाधान’ अभियान की सफलता
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी पहल पर शुरू किया गया “संकल्प से समाधान” अभियान इंदौर जिले में बड़ी सफलता की कहानी लिख चुका है। इस अभियान के तहत अब तक 1,44,912 आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। यह अभियान प्रदेश के सभी 55 जिलों में प्रभावी ढंग से संचालित हुआ, जिससे आम जनता की समस्याओं का समाधान उनके दरवाजे तक पहुंचाया गया।
प्रदेश में जल संरक्षण के व्यापक प्रयास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण को प्राथमिकता बताते हुए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का जिक्र किया:
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जल गंगा संवर्धन अभियान: गुड़ी पड़वा से शुरू यह अभियान गंगा दशमी तक चलेगा, जिसमें लगभग 2.75 लाख जल स्रोतों (कुएं, बावड़ी, तालाब) का निर्माण और पुनर्जीवन किया जाएगा।
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केन-बेतवा लिंक परियोजना: इस परियोजना से बुंदेलखंड के 25 जिलों को सिंचाई और पेयजल की सुविधा मिलेगी।
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पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना: इससे मध्यप्रदेश और राजस्थान के 13 जिलों में जल संसाधनों को मजबूती मिलेगी।
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शिप्रा नदी पुनर्जीवन: आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए शिप्रा नदी में स्वच्छ जल का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र देश का दूसरा सबसे बड़ा महानगरीय क्षेत्र बनने की ओर अग्रसर है, जहाँ भविष्य में डेढ़ करोड़ की आबादी होगी। इसके मद्देनजर आगामी 25 वर्षों के लिए जल आपूर्ति की समग्र योजना बनाई गई है।
मुख्य परियोजनाओं का विवरण (सारणी)
| परियोजना का नाम | लागत (करोड़ रुपये में) | मुख्य लाभ |
|---|---|---|
| नर्मदा जल परियोजना (चतुर्थ चरण) | 1356 | इंदौर शहर में जलापूर्ति क्षमता बढ़ाना, भविष्य की जरूरतों को पूरा करना। |
| सिरपुर एसटीपी प्लांट | 62.72 | रामसर साइट सिरपुर तालाब के जल को प्रदूषण मुक्त रखना। |
| केन-बेतवा लिंक परियोजना | राष्ट्रीय परियोजना | बुंदेलखंड के 25 जिलों में सिंचाई और पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC) परियोजना | अंतर-राज्यीय परियोजना | मध्यप्रदेश और राजस्थान के 13 जिलों में जल संसाधनों का विस्तार। |
नर्मदा जल परियोजना (चतुर्थ चरण) के तकनीकी घटक (सारणी)
| पैकेज | मुख्य कार्य | विवरण |
|---|---|---|
| पैकेज-1 | जल ग्रहण एवं उपचार | 1650 एमएलडी इंटेक, 400 एमएलडी ट्रीटमेंट प्लांट, पंपिंग स्टेशन। |
| पैकेज-2 | जल परिवहन | 39 किमी ग्रेविटी पाइपलाइन, 2870 मीटर लंबी टनल, क्लोरिनेशन प्लांट। |
| पैकेज-3 | वितरण तंत्र (भाग 1) | 20 नए ओवरहेड टैंक, 29 पुराने टैंकों का उन्नयन, 685 किमी पाइपलाइन, 1.26 लाख नए कनेक्शन। |
| पैकेज-4 | वितरण तंत्र (भाग 2) | 20 नए ओवरहेड टैंक, 46 पुराने टैंकों का उन्नयन, 892 किमी पाइपलाइन, 1.21 लाख नए कनेक्शन। |
यह विकास कार्य न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के भविष्य को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। जल संरक्षण और प्रबंधन के ये प्रयास राज्य को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: नर्मदा जल परियोजना का चतुर्थ चरण क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह चरण इंदौर शहर की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इसके पूरा होने पर शहर में जलापूर्ति क्षमता बढ़कर लगभग 900 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) हो जाएगी, जो 65 लाख लोगों की जरूरतों को पूरा करेगी।
प्रश्न 2: “जल गंगा संवर्धन अभियान” का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश भर में स्थित पारंपरिक जल स्रोतों (कुओं, बावड़ियों, तालाबों) का जीर्णोद्धार और नए जल स्रोतों का निर्माण करना है, ताकि भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके और जल संकट से निपटा जा सके।
प्रश्न 3: “संकल्प से समाधान” अभियान क्या था?
उत्तर: यह एक जन-केंद्रित अभियान था, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों की विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़ी शिकायतों और आवेदनों का त्वरित और पारदर्शी तरीके से निराकरण करना था। इंदौर में इसके उल्लेखनीय परिणाम मिले हैं।
प्रश्न 4: सिरपुर में बने एसटीपी प्लांट का क्या महत्व है?
उत्तर: सिरपुर तालाब एक रामसर साइट (अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि) है। यह एसटीपी प्लांट तालाब में गिरने वाले गंदे पानी को शोधित करेगा, जिससे तालाब के जल की गुणवत्ता में सुधार होगा और यहां की जैव विविधता को संरक्षित किया जा सकेगा।


